Provisional GDP estimates for the financial year 2025-26

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय आय के अनंतिम अनुमान जारी किये हैं, जिससे पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर बढ़कर 7.7% हो गई है, जोकि वित्त वर्ष 2024-25 में 7.1% थी।
- मुख्य आर्थिक विकास: संपूर्ण वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिये भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.7% रही, जो फरवरी 2026 में जारी 7.6% के अनुमान से अधिक है।
- हालाँकि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संकट और सामान्य से कम मानसून की आशंकाओं के कारण उत्पन्न होने वाले संभावित जोखिमों के चलते वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी वृद्धि दर के घटकर 6.6% रहने का अनुमान लगाया है।
- क्षेत्रवार प्रदर्शन की विविधता:
- विनिर्माण पॉवरहाउस: विनिर्माण क्षेत्र में वित्त वर्ष 26 में 10.7% का विस्तार हुआ (वित्त वर्ष 25 में यह 9.3% था)।
- सेवा क्षेत्र में उछाल: व्यापार, मरम्मत, होटल, परिवहन और संचार जैसे प्रत्यक्ष संपर्क वाले क्षेत्रों की वृद्धि दर पिछले वित्त वर्ष के 6.6% से बढ़कर वित्त वर्ष 26 में 11% हो गई।
- कृषि में मंदी: ढाँचागत जलवायु सुभेद्यता को उजागर करते हुए, कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि दर वित्त वर्ष 25 के 4.2% से घटकर वित्त वर्ष 26 में 3% पर आ गई।
- मैक्रोइकोनॉमिक डिमांड ड्राइवर:
- निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE): शहरी और ग्रामीण मांग में सुधार को दर्शाते हुए, PFCE की गति वित्त वर्ष 25 के 5.8% से काफी तेज़ होकर वित्त वर्ष 26 में 7.7% हो गई।
- सकल स्थायी पूंजी निर्माण (GFCF): निरंतर क्षमता विस्तार और बुनियादी ढाँचे के निर्माण का संकेत देते हुए, GFCF (जो निवेश संबंधी गतिविधि का पैमाना है) वित्त वर्ष 25 के 6.4% के मुकाबले वित्त वर्ष 26 में 8.2% की दर से बढ़ा।
सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी विशिष्ट अवधि के दौरान देश के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य है तथा यह आर्थिक विकास एवं उत्पादकता के एक प्रमुख संकेतक के रूप में कार्य करता है।
- GDP को नॉमिनल GDP (वर्तमान कीमतों पर) या वास्तविक GDP (मुद्रास्फीति-समायोजित) के रूप में मापा जा सकता है।
- संभावित GDP से तात्पर्य उस अधिकतम संधारणीय (सस्टेनेबल) उत्पादन से है, जिसे कोई अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीति को बढ़ाए बगैर प्राप्त कर सकती है।
- भारत ने वर्ष 2015 में आधार वर्ष 2011-12 और बाज़ार-मूल्य दृष्टिकोण (मार्केट-प्राइस अप्रोच) को अपनाकर अपनी जीडीपी पद्धति में संशोधन किया था। औपचारिकीकरण (फॉर्मलाइज़ेशन), डिजिटलीकरण और महामारी के बाद के आर्थिक बदलावों को दर्शाने के लिये, अब GDP के आधार वर्ष को अपडेट करके वर्ष 2022-23 कर दिया गया है और इसकी संशोधित शृंखला फरवरी 2026 में जारी की गई है।





